डिप्रेशन में पूर्व मंत्री

1 सितंबर 2019
डेढ़ दशक तक सत्ता सुख भोग चुके बीजेपी के कुछ मंत्रियों की स्थिति बेहद खराब होती जा रही है। खबर है, एक पूर्व मंत्रीजी डिप्रेशन में चले गए हैं। परिवार के लोग लगातार बिगड़ रही उनकी स्थिति से बेहद परेशान है। इलाज के लिए मुंबई के किसी डाक्टर से टाईम लेने का प्रयास किया जा रहा है। रमन मंत्रिमंडल में 12 मंत्री थे। इनमें से तीन चुनाव जीत पाए। बृजमोहन अग्रवाल, अजय चंद्राकर और पुन्नूलाल मोहले। हालांकि, कुछ पूर्व मंत्रियों ने अपने को पढ़ने-लिखने या फिर संगठन के काम में इंगेज कर लिया है। अमर अग्रवाल और अजय चंद्राकर को नगरीय और संगठन चुनाव की अहम जिम्मेदारी मिल गई है। इससे दोनों के घर पर मिलने-जुलने वालों की संख्या बढ़ने लगी है। एक आदिवासी मंत्री हैदराबाद में अपने अ-सरदार मित्रों के साथ कारोबार चालू कर दिए हैं। लिहाजा, हैदराबाद का उनका महीने में तीन-चार चक्कर लग जाता है। लेकिन, बाकी पूर्व मंत्रियों की स्थिति ठीक नहीं है….बेचारों के पास सुविधाओं के नाम पर सब कुछ है लेकिन हाथ जोड़े खड़ी पब्लिक नहीं है, जिसे देखकर वे कभी मुंह फेर लेते थे।

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बदलेंगे प्रभारी मंत्री

दंतेवाड़ा के प्रभारी मंत्री जयसिंह का प्रभार जिला बदल सकता है। वे हरेली में दंतेवाड़़ा नहीं जा पाए थे और न ही स्वतंत्रता दिवस पर परेड में शामिल हुए। जय सिंह की अनुपस्थिति में सरकार ने दोनों कार्यक्रमों में मनोज मंडावी को अतिथि बनाया था। अब अमरजीत भगत बारहवें मंत्री के रूप में कामकाज संभाल लिए हैं। लिहाजा, उन्हें भी जिला का प्रभार दिया ही जाएगा। समझा जाता है, प्रभार वाले जिलों का एक बार फिर पुनर्गठन करके अमरजीत को एडजस्ट किया जाएगा। उसी में जय सिंह को किसी जिले का प्रभार दिया जा सकता है।

आईपीएस आगे

बाकी मामलों में भले ही आईएएस आगे रहते होंगे, लेकिन छत्तीसगढ़ में जिला संभालने के मामले में आईपीएस आगे निकल गए हैं। सूबे में 2014 बैच के आईपीएस पुलिस अधीक्षक बन गए हैं। मगर कलेक्टर बनने में अभी आईएएस का 2011 बैच ही कंप्लीट हुआ है। 2012 बैच का कुछ दिनों पहिले ही खाता खुला है। रजत बंसल इस बैच के पहिले आईएएस हैं, जिन्हें कलेक्टर बनने का मौका मिला। वे धमतरी के कलेक्टर हैं। दरअसल, राज्य में आईपीएस कम आ रहे हैं। इसलिए, उन्हें चार साल में जिले की कमान मिल जा रही। आईएएस में ऐसी बात नहीं है। 2005 बैच से हर साल पांच से छह आईएएस छत्तीसगढ़ को मिल रहे हैं। इससे कलेक्टरी में कंपीटिशन टफ होता जा रहा है।

नए जिले में OSD

छत्तीसगढ़ का नया जिला पेंड्रा-गौरेला के लिए जल्द ही नोटिफिकेशन जारी होने वाला है। नोटिफिकेशन के बाद किसी आईएएस को वहां विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी याने ओएसडी नियुक्ति किया जाएगा। ओएसडी नवगठित जिले की तमाम औपचारिकताएं पूरी कराएंगे। इसमें जिले स्तर के कार्यालय, अफसरों के आवास समेत जिले की सीमा का निर्धारण भी शामिल होगा। लगभग छह महीने का यह प्रासेज होता है। इसके बाद फिर विधिवत रूप से नए जिले का आगाज होगा। वैसे, आमतौर पर ओएसडी को ही संबंधित जिले का कलेक्टर अपाइंट कर दिया जाता है। पिछली सरकार ने लास्ट में छह नए जिले बनाई थी, उसमें भी छह महीने का वक्त लग गया था। 15 अगस्त को तत्कालीन सीएम रमन सिंह ने ऐलान किया था। और, अगले जनवरी में नए जिलों में कामकाज प्रारंभ हो पाया था। इस बार सरकार चाहती है राज्योत्सव के दिन याने एक नवंबर को पेंड्रा-गौरेला-मरवाही के लोगों को नए जिले की सौगात मिल जाए। अगर ऐसा है, तो सरकार को ठीक-ठाक आईएएस को ओएसडी अपाइंट करना होगा, जो दो महीने में पूरा काम निबटा दे।

दिक्कत नहीं

नए जिले में पोस्टिंग से अफसर इसलिए घबराते हैं कि वहां बुनियादी सुविधाएं होती नहीं। कनेक्टीविटी का भी प्राब्लम रहता है। लेकिन, पेंड्रा-गौरेला में पोस्ट होने वाले कलेक्टर, एसपी समेत तमाम अफसरों को इसकी दिक्कत नहीं जाएगी। पेंड्रा रेल मार्ग पर है। वहीं, बिलासपुर के एडिशनल कलेक्टर हफ्ते में तीन दिन वहां पहले से बैठते हैं। एडिशनल एसपी का भी आफिस है। लिहाजा, बंगला, गाड़ी की दिक्कत नहींं होगी। गौरेला-पेंड्रा का मार्केट भी सूबे के करीब दस जिला मुख्यालयों से बड़ा होगा। दोनों जगहों पर व्यापारिक वर्ग की बहुतायत है। इसलिए, ओएडी बनने वाले बिना किसी टेंशन के पेंड्रा जाएं।

मंत्री की मुश्किलें

हायर एजुकेशन मिनिस्टर उमेश पटेल की नाराजगी आईएएस हिमशिखर गुप्ता पर भारी पड़ी। सरकार ने उन्हें कमिश्नर हायर एजुकेशन से हटाकर प्रशासन अकादमी भेज दिया। हिमशिखर के बाद शारदा वर्मा को नया कमिश्नर अपाइंट किया गया है। रेणु पिल्ले हायर एजुकेशन में पहिले से प्रिंसिपल सिकरेट्री हैं। दोनों महिला अफसर। रेणु नियम कायदों पर चलने वाली तेज-तर्राट आईएएस….अपनी भी नहीं सुनने वाली। शारदा वर्मा की भी फाइल और नोटशीट की लिखा-पढ़ी में जवाब नहीं है। ऐसे में, क्या होगा युवा मंत्री उमेश पटेल का। सरकार कितने बार, कितनों को हटाएगी।

अच्छी खबर

छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस एन बैजेंद्र कुमार एनएमडीसी के सीएमडी हैं। और, अब छत्तीसगढ़ में असिस्टेंट कलेक्टर, सीईओ और कलेक्टर रहे आईएएस प्रमोद अग्रवाल कोल इंडिया के चेयरमैन सलेक्ट हो गए हैं। राज्य के बंटवारे से पहले प्रमोद महासमुंद के कलेक्टर रहे। इसके बाद उनका कैडर मघ्यप्रदेश हो गया। छत्तीसगढ़ के लिए इससे अच्छी बात क्या होगी। देश की दो मिनी रत्न कंपनियों में अब छत्तीसगढ़ का दबदबा होगा। इससे निश्चित तौर पर सूबे को लाभ होगा। आखिर, बैजेंद्र कुमार यहां से जुड़े थे, इसीलिए तो नगरनार स्टील प्लांट का मुख्यालय जगदलपुर और एनएमडीसी में क्लास थ्री और फोर्थ क्लास की भरती परीक्षा दंतेवाड़ा में आयोजित करने करने का फैसला करने में देर नही लगाई। इसी तरह प्रमोद अग्रवाल से भी लोगों की उम्मीदें रहेगी ही। कोल इंडिया की सबसे बड़ी कंपनी साउथ ईस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड की 80 फीसदी से अधिक कोयला खदाने छत्तीसगढ़ में ही है। मुख्यालय भी बिलासपुर में है। एसईसीएल में रोजगार के अवसर बढ़ाने पर के लिए भी राज्य सरकार उनसे बात कर सकती है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले का मुख्यालय इन तीनों में से कहां बनेगा?
2. भूपेश बघेल सरकार के एक सीनियर मंत्री को आजकल स्वभाव के विपरीत गुस्सा क्यों आ रहा है?

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