इस्तीफा देने वाले IAS से बोली सरकार- इस्तीफा अभी स्वीकार नहीं हुआ, काम करते रहें आप…. जानिए क्या था पूरा मामला

नईदिल्ली 29 अगस्त 2019। जम्मू कश्मीर में लगी पाबंदियों को लेकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) से इस्तीफा देने वाले केरल के कन्नन गोपीनाथन को उनका इस्तीफा स्वीकार किये जाने तक उन्हें तुरंत अपनी ड्यूटी ज्वाइन करने और काम करने के लिए कहा गया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी कन्नन गोपीनाथ ने जम्मू-कश्मीर के लोगों को अभिव्यक्ति की आजादी न दिए जाने के मुद्दे पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्हें तुरंत अपनी ड्यूटी पर वापस लौटने के लिए कहा गया है। केरल के रहने वाले कन्नन इस्तीफा देने से पहले केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली में तैनात थे। वह 2012 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।

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जम्मू-कश्मीर के मामले को लेकर पिछले सप्ताह अपने पद से इस्तीफे देने वाले आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन को सरकार ने कहा है कि जब तक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हो जाता, वह वापस लौटे और काम करते रहें. गोपीनाथन ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” से वंचित किया जा रहा है, उन्हें यह स्वीकार्य नहीं था। कन्नन गोपीनाथन केंद्र शासित प्रदेशों दमन और दीव, दादरा और नगर हवेली के बिजली विभाग के सचिव थे। गोपीनाथन ने 21 अगस्त को गृह मंत्रालय को अपना इस्तीफा सौंपा था. दमन और दीव कार्मिक विभाग ने उन्हें इस्तीफा स्वीकार नहीं होने तक कार्यालय में उपस्थित होने के लिए कहा है।

27 अगस्त को जारी हुए नोटिस पर दमन और दीव के कार्मिक विभाग में कार्यरत उप सचिव गुरप्रीत सिंह के हस्ताक्षर हैं। जिसमें लिखा है, ‘सरकारी अधिकारी का इस्तीफा स्वीकार किए जाने पर प्रभावी होता है। इसलिए आपको निर्देश दिया जाता है कि आप तब तक खुद को मिली जिम्मेदारियों का निर्वहन करना शुरू कर दें जब तक कि आपके इस्तीफे पर कोई फैसला नहीं हो जाता है।’

बता दें कि 2012 सिविल सेवा परीक्षा में कन्नन ने 59वीं रैंक हासिल की थी। उन्होंने बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग की थी। आईएएस बनने से पहले वह एक निजी कंपनी में डिजाइन इंजीनियर थे। इस्तीफा देने के बाद उन्होंने कहा था, ‘कश्मीर पर फैसला लिए लगभग 20 दिन बीत चुके हैं और अब भी वहां के लोगों को इस पर प्रतिक्रिया या जवाब देने की अनुमति नहीं है और यह एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं है। व्यक्तिगत रूप से मैं इसे स्वीकार नहीं कर सकता और ऐसे समय में सेवा नहीं कर सकता।’

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