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राहुल के बहाने क्या साध रही है कांग्रेस !… भूपेश बोले “इंतज़ार करिए और देखिए.. कैसे बदल रही है फ़िजां”

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रायपुर,16 मई 2018। आख़िरकार राहुल गांधी का छत्तीसगढ के चुनावी समर में आगमन हो गया है,पर क्या बस एक दौरे के ज़रिए कांग्रेस वह सत्ता की जादुई चराग को रगड़ लेगी जिसके बाद पंद्रह बरसो से सत्ता से दूरी ख़त्म हो जाए। तो इसका जवाब कांग्रेस के भीतरखाने से कुछ यूँ मिलता है कि, यह राहुल गांधी के छत्तीसगढ के चुनावी परिदृश्य में आगमन है और बहुत जल्द गुजरात की तर्ज़ पर वे छत्तीसगढ में लगातार नुमाया होंगे।
पीसीसी चीफ भूपेश बघेल इस दौरे को लेकर बेहद उत्साहित हैं, और सत्ता में वापसी को लेकर हद तक निश्चिंत भी। वे लगातार अनवरत आंदोलनों और सदन से लेकर सडक पर सरकार को घेरने का ज़िक्र करते हैं। उनसे NPG पूछता है कि, कर्नाटक में तो हालिया हारे, राहुल क्या उत्साह जगाएँगे, पलट कर जवाब आया
“गुजरात में जो पानी पिलाए हैं, वो याद नही है क्या, और सूनिए भैया यह जो हो रहा है न कर्नाटक में, वहाँ का आँकड़ा ज़रा ढंग से देखिए लोकसभा में कितने प्रतिशत वोट था भाजपा का और अब कितना है, कर्नाटक के अलावा बाक़ी राज्यों में जो किया गया वो सबको समझ आ रहा है”
भूपेश बघेल का दावा है कि, विकास यात्रा की प्रायोजित भीड़ जिसे जुटाने के लिए कार्यकर्ता की तरह सरकारी मशीनरी जुटी है, उससे कहीं बेहतर और प्रभावी विकास खोजो यात्रा है, पीसीसी चीफ भूपेश दावा करते है
“बुलाई गई भीड़ नही स्वस्फुर्त भीड़ लोकतंत्र के चुनावी महायज्ञ में निर्णायक होती है”
बहरहाल राहुल गांधी का जो कार्यक्रम है वो बहुत सधे अंदाज मे है। राहुल सीतापुर मे किसान आदिवासी सम्मेलन में शामिल होंगे, सीतापुर का मतलब अविभाजित सरगुजा, सरगुजा संभाग और रायगढ़ है।कोटमी में पेशा एक्ट ग्रामसभा के बावजूद बेबस ग्रामीणों से मिलेंगे, कोटमी के इर्द गिर्द बड़ा इलाक़ा है जहाँ उद्योग है और विरोध में घमासान जारी है, यह विरोध कहीं एकता परिषद के बैनर तले है तो कहीं गोंडवाना गणतंत्र के ज़रिए, राहुल के मंच पर गोंडवाना एकता परिषद को बैठाने का मतलब केवल एक कार्यक्रम तक नही है, इसके आने वाले चुनाव से सीधे तार जुड़ते हैं, पीसीसी चीफ भूपेश बघेल कहते हैं
“राजनीति संभावनाओं का क्षेत्र है, आगे क्या होगा मैं अभी से कैसे कह सकता हूँ, अभी तो उनकी उपस्थिति हाल बताने के लिए है”
कोटमी के इस सभा के बाद बिलासपुर संभाग की 24 सीटों के बूथ प्रभारियो से संवाद होगा, और रोड शो, जिसमें दस विधानसभाएँ सीधे तौर पर शामिल हैं।इस बीच पंचायत प्रतिनिधियों से संवाद का कार्यक्रम भी है, जिसमें ज़ाहिर है उपस्थिति बस्तर से भी होनी है।
याने कार्यक्रम कुछ यूँ तय है कि राहुल की मौजूदगी और संवाद पूरे प्रदेश के कांग्रेस कार्यकर्ताओं से हो जाए।
पीसीसी चीफ भूपेश बघेल इस दौरे को लेकर आ रही परेशानियों को लेकर आक्रामक हैं, लेकिन वे कहते हैं
“जो सामने आ रहा है वो सामने है ही नही, बैकडेट पर आवेदन लेना मंज़ूर करना, एन वक़्त पर सरपंच सचिवों की बैठक रखना यह सब बताता है कि, पीछे कौन है, और जो सबसे बेहतर है वो यह है कि जनता सब देख रही है”
पीसीसी चीफ भूपेश बघेल इस बात का ज़िक्र बार बार करते है जबकि वे इस दावे को दोहराते हुए कहते हैं
“मेरी जवाबदेही बहुमत लाना, वो मैं लाउँगा और मुझे बेहद गंभीर जवाबदेही मिली है और मुझ पर भरोसा किया गया है, बहुमत आकर रहेगा”
वे इस दावे के पीछे का धरातल पूछने पर कार्यकर्ताओं के उत्साह का ज़िक्र करते हुए अचानक मुस्कुराते हुए कहते हैं
“थोड़ा रुको तो सही, देखते जाइए, रोड शो से लेकर हर कार्यक्रम सफल होगा और उन लक्ष्यों तक पहुँचेगा जो कि वाकई लक्ष्य है”
भूपेश भाजपा के उस तंज पर जिसमें कि रोड शो में भीड नही होती की बात कही गई, उस पर कहते हैं
“मेरे अभिन्न मित्र भूल जाते है पदयात्रा को, जिसके बाद उनके संगठन को पदयात्रा करनी पड़ी”
चलते चलते भूपेश से उनके पिता नंद कुमार बघेल की ज़मीन मसले पर बात होती है, कंधे पर हाथ रख कर मुस्कुराते भूपेश कहते है
“ वो ज़मीन के लिए मेरे पिता 1975 से लड़ रहे हैं, पुराने रिकॉर्ड में वो ज़मीन दादाजी के नाम पर है, और जो अपनी ज़मीन की लड़ाई लड रहा है वो आगे कोर्ट भी जाऐगा, पर इस पूरे मामले में मैं कहाँ हूँ, मेरे अभिन्न मित्र की पार्टी होमवर्क ढंग से ना करे तो बताओ मैं क्या करुं “

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